चंडीगढ़ के महासचिव चन्द्रशेखर के नेतृत्व में चंडीगढ़ के उपायुक्त मो.शाईन से मिले

चंडीगढ़ 29 जनवरी, 2015: चंडीगढ़ के सैक्टर 48ए की इंडियन एक्सप्रैस एम्पलाईज अर्पाटमेंट सोसायटी का प्रतिनिधिमंडल भारतीय जनता पार्टी चंडीगढ़ के महासचिव चन्द्रशेखर के नेतृत्व में चंडीगढ़ के उपायुक्त मो.शाईन से मिला। प्रतिनिधिमंडल में जिला नं. 3 के अध्यक्ष देवी सिंह, सोसायटी से एस.एस. रावत, एल.एन पटनायक, वाई.एस. राणा व डी.एस. वर्मा शामिल थे।

प्रतिनिधिमंडल ने चंडीगढ़ की सोसायटियों की समस्याओं को लेकर उपायुक्त को ज्ञापन दिया, जिसमें उन्होंने सोसायटियों में बिल्डिंग कम्पलिशन से संबंधित समस्याओं की ओर ज्ञापन द्वारा उपायुक्त का दिलाया।

प्रतिनिधिमंडल ने 2-3 सोसायटियों को एक साथ जोडऩे के कारण उत्पन समस्याओं से प्रशासन की बिल्डिंग ब्रांच द्वारा कम्पलिशन प्रमाण पत्र जारी न करने की समस्या को मुख्य तौर पर उठाया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यदि आपस में जोड़ी गई एक सोसायटी अपनी वायलेशन को दूर कर लेती है तथा अन्य सोसायटियाँ जो पहली सोसायटी के साथ जोड़ी हुई है वह अपनी वायलेशन दूर नहीं करती तो वायलेशन दूर करने वाली सोसायटी को भी कम्पलिशन प्रमाण पत्र नहीं दिया जाता। तथा वायलेशन दूर करने वाली सोसायटी को फिज़ूल ही बिल्डिंग विभाग से माथा-पच्ची करनी पड़ती है और किसी दूसरे की गलती का जुर्माना भी भुगतना पड़ता है।

प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त से मांग की कि सोसायटियों में किसी भी प्रकार का बिल्डिंग वायलेशन का नोटिस पहले सोसायटी को दिया जाए न कि उसे सीधा हाई कोर्ट में जमा करवाया जाए, सोसायटी के निवासियों को यदि कोई वायलेशन है तो उन्हें उसकी जानकारी हो तथा वह इसे समय रहते ठीक करवा सके। जिससे कोर्ट में जाने पूर्व वह अपना पक्ष पूरी तरह से तैयार करके जाए।

प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त से यह भी मांग की कि यदि सोसायटी में कोई बिल्डिंग वायलेशन है तो उन्हें उसकी जानकारी एक ही बार में दी जाए क्योंकि जब वह एक बार वायलेशन को दूर कर प्रशासन बिल्डिंग विभाग के पास कम्पलिशन प्रमाण पत्र के लिए जाते हैं तो उन्हें प्रशासन द्वारा दूसरी लिस्ट थमा दी जाती है।

प्रतिनिधिमंडल ने सोसायटी के पानी का बिल रूल्स और बायलाज़ जोकि बिल के पिछली और छपा रहता है उसके मुताबिक देने का अग्रह किया। सोसायटियों को बिल्डिंग कम्पलिशन संबंधित समस्या के कारण 18-19 गुणा ज्यादा पानी का बिल भरना पड़ रहा है जिसके कारण सोसायटियों के निवासियों ने जो पानी उपयोग ही नहीं किया उसका भी वह बिल भरने को मजबूर हैं।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि प्रशासन ने वर्ष 2008 में सौर ऊर्जा प्लांट तथा वाटर हारवेसटिंग सिस्टम पालिसी बनाई थी परन्तु कुछ सोसायटियों की कंस्ट्रक्शन वर्ष 1998 में पूरी हो चूकी थी। उस समय इस पालिसी को चीफ आर्केटेक्ट द्वारा पास जोनिंग प्लान में कोई प्रोविजन नहीं था। इसलिए वर्ष 2008 से पहले बनी सोसायटियों में अब यह दोनों सिस्टम संभव नहीं है। इसलिए वर्ष 2008 से पहले बनी सोसायटियों को इन दोनों सिस्टम से छूट दी जाए।

प्रतिनिधिमंडल की सभी मांगों को उपायुक्त मो. शाईन ने बड़ी गंभीरता से सुना व इस पर तुरंत फैसला लेते हुए इस समस्या से संबंधित विभाग के अधिकारियों के साथ अगले सप्ताह बैठक कर इन सभी समस्याओं को दूर करने का आश्वासन दिया।