भाजपा ने मनाई पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती

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चंडीगढ़ २६ सित6बर, २०१४:  भारतीय जनता पार्टी चंडीगढ़ इकाई के अध्यक्ष श्री संजय टंडन की अध्यक्षता में पार्टी कार्यालय कमलम्, सै1टर ३३-ए में जनसंघ के पूर्व अध्यक्ष एवं सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के पे्ररणता पंडित दीनदयाल उपाध्याय जन्मदिवस पर समर्पण दिवस के रूप में मनाया। इस मौके पर हीरा नेगी, रघुबीर लाल अरोड़ा, रामवीर भट्टी, रामलाल, बी.के. सूद, प्रैम कौशिक, रमेश शर्मा नि1कू, अनिता चौधरी, बलविन्द्र कौर राणा, राजेश गुप्ता, गजेन्द्र शर्मा, गिरधारी लाल जिंदल, भीम सैन अग्रवाल, डॉ.ए.पी सांवरिया, रविकांत शर्मा, देवी सिंह, शिंगारा सिंह, झुजार सिंह, भजन सिंह माड़ू, रुपी सिंह, दीपक शर्मा, दीपक मल्होत्रा, प्रिंस भंदूला, बलजिन्द्र गुजराल, सुरेन्द्र सूद, सरदारी लाल, डॉ. हुकम चंद, स्वराज उपाध्याय, शीश पाल गर्ग, उमंग शर्मा, भरत कुमार, अमर पासी आदि प्रमुख रूप से मौजूद थे। कार्यक्रम की शुरूआत प्रदेशाध्यक्ष संजय टंडन द्वारा दीप प्रज्जवलित करके किया गया।

पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री संजय टंडन ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जीवन उन्हें यह बोध देता है कि परिस्थितियां कैसी भी हो लेकिन मन:स्थिति का निश्चय अटल हो, मार्ग कितना भी कठिन और दुर्गम हो, लक्ष्य के प्रति निष्ठा अविचल हो विजयश्री अवश्य प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जीवन बचपन से अंत तक बहुत संघर्षपूर्ण रहा। अपना सारा जीवन सादगी में बिताया। उन्होंने कहा कि प. दीनदयाल उपाध्याय जी का स्थान भारतीय चिंतन पर6परा में काफी महत्वपूर्ण है। उन्होंने देश को एकात्ममानव दर्शन जैसी प्रगतिशील विचारधारा दी। किसी ने सच ही कहा है कि कुछ लोग सिर्फ समाज बदलने के लिए जन्म लेते हैं और समाज का भला करते हुए ही खुशी से मौत को गले लगा लेते हैं, उन्हीं में से एक हैं पंडित दीनदयाल उपाध्याय जिन्होंने अपनी पूरी जिन्दगी समाज के लोगों को ही समर्पित कर दी।

संजय टंडन ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय इस बात से चिंतित थे कि केवल श्रेष्ठ विचारधारा के प्रचार के आधार पर कोई दल शक्तिशाली नहीं हो जाता। आज के युग में प्रचार का महत्व तो है मगर पंडितजी चाहते थे कि प्रशिक्षित एवं सिद्धांतनिष्ठ कार्यकर्ताओं के माध्यम से ‘जनसंपर्कÓ का काम होना चाहिए। वह प्रतिबद्धता और निष्ठा के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं की टीम बनाने में संलग्न रहे। श्री संजय टंडन ने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि हम सबको प. दीनदयाल उपाध्याय जी के दिखाए मार्ग पर चलना चाहिए और उनके आदर्शों का अनुसरण करना चाहिए।

रघुबीर लाल अरोड़ा एवं रामवीर भट्टी ने भी अपने संबोधन में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन बारे में रोशनी डालते हुए कहा कि जो व्य1ित प्रतिभाशाली होता है उसने बचपन से प्रतिभा का अर्थ समझा होता है और उनके बचपन के कुछ किस्से ऐसे होते हैं जो उन्हें प्रतिभाशाली बना देते हैं, उनमें से एक है पं. दीनदयाल उपाध्याय जिन्होंने अपने बचपन से ही जिन्दगी के महत्व को समझा और अपनी जिन्दगी में समय बर्बाद करने की अपेक्षा समाज के लिए नेक कार्य करने में समय व्यतीत किया।