CHD Bjp President Sh. Sanjay Tandon writes to Shri Rajnath Singh on Dictatorial Attitude of the Administrator Chandigarh and Chandigarh Admn.

Hon. Sh. Rajnath Singh Ji,
Union Home Minister of India,
New Delhi.

Subject: Dictatorial attitude of the Administrator Chandigarh and Chandigarh Administration

Respected sir,

Through this letter I want to apprise you of the dictatorial attitude of Chandigarh’s Administrator, and the bureaucracy of the Chandigarh Administration.

During the last 15 years that Mr Pawan Bansal was the MP of the city and particularly during the last 10 years of the UPA rule there has been gross neglect of the public’s voice and opinion. Decisions have been taken and implemented by the Administration despite stiff opposition from the people and the political parties. Each of these was always presented as fait-accompli. Over the years the Administrator-bureaucracy nexus became so strong that even the local MP was rendered completely ineffective.  The limited amount of time that he could spare for the city only worsened the situation. With the change in the political dispensation in the country, the expectations are very high from the new Government and the people are looking forward to being heard.

However, recently the ‘nexus’ gave us another example of their high handedness which I want to bring to your notice. A meeting of the Administrator’s Advisory Council was decided to be held on 16th June, 2014. Besides other issues the extremely important item of the Master Plan of the City was on the agenda. Considering the importance of the meeting the newly elected BJP MP of the city, who is an ex-officio member of the Council, communicated to the administration that due to prior commitments she was not available on 16th June but would be available for several months after 29th June. The fact that the people of the city have been ignored is very evident, as such meetings of the council were not held periodically, and the last meeting was held on 30th November, 2012. For their own reasons the Administration decided to postpone the meeting but only to 19th June while it could easily have been held after 29th June. Certainly after about a year and a half, ten days was not a long time. It is clear that there is absolute disregard for the public representatives.  It is pertinent to mention that the Member of the Parliament is next in hierarchy to the Administrator in the Advisory council and hence has a special status.

During the meeting, Mr Sanjay Tandon (State President BJP), Mr Satya Pal Jain (former MP) and Mr Bhajan Singh Maru  (Dist. President), all members of the council, raised objection to this but were told that even Central Minister had not been asked for fixing this meeting in the past, then who are ordinary representatives of the public. The autocratic attitude was evident when the administrator said that he could call the meeting at his discretion and was not bound to consult anyone for this and that he would function as such irrespective of the participation or absence of any representative of the people.

The matter is extremely serious because the residents of the city are looking to be freed from the shackles of this Administrator-bureaucracy nexus. They are expecting this deliverance from the BJP representative and NDA Government.

I request you to take immediate action on this so that the aspirations of the people are not belied, and we can be more effective in being of service to the people. I feel that, it would be in order to dissolve the Administrator’s Advisory Council, and reconstitute it with members who truly represent the people of the city.

Through this letter I want to suggest that, you may kindly direct the Home Secretary, Govt of India, to officially visit the city to personally take stock of the situation and convey the ‘always available to the people’ ethos of the Modiji led NDA government to the Chandigarh Administration.

With sincere regards,
Sanjay Tandon


HINDI

माननीय श्री राजनाथ सिंह जी,
मंत्री, गृह मंत्रालय,
भारत सरकार,
नई दिल्ली।

विषय :    चंडीगढ़ प्रशासक एवं चंडीगढ़ प्रशासन का जनप्रतिनिधियों के प्रति तानाशाही रवैया।

आदरणीय मंत्री जी,

इस पत्र द्वारा मैं चंडीगढ़ के प्रशासक एवं चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारियों का तानाशाही रवैया आपके ध्यान में लाना चाहता हूँ।

पिछले 15 वर्षों से श्री पवन कुमार बंसल चंडीगढ़ के सांसद रहे और खासतौर पर पिछले 10 वर्ष के यूपीए शासन के दौरान जनता एवं राजनैतिक दलों की आवाज व सलाह की खास तौर पर अनदेखी की गई। जनता के पुरजोर विरोध के बावजूद प्रशासन द्वारा अपने तौर पर फैसले लिए गए व लागू भी किए गए और हर बार ‘यह तो होना ही हैÓ कह कर फैसलों को लागू किया गया। पिछले सालों के दौरान प्रशासक अफसरों की मिलीभगत इतनी मजबूत हो गई कि स्थानीय सांसद भी बेबस बन कर रह गए। बहुत मामूली समय जो सांसद शहर के लिए निकाल पाए उससे भी शहर की स्थिति बदतर ही हुई। देश में राजनैतिक परिदृश्य बदलने के साथ देश की जनता की नई सरकार से अपेक्षाऐं भी बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं तथा जनता उम्मीद करती है कि सरकार उनकी सुनवाई जरूर करेगी।

अभी कुछ दिन पहले ही प्रशासक व प्रशासन के अफसरों के संबंधो की मिलीभगत का एक और उदाहरण सामने आया है जोकि मैं आपके ध्यान में लाना चाहता हूँ। प्रशासक की सलाहकार कमेटी की एक महत्वपूर्ण बैठक 16 जून, 2014 को होनी निश्चित हुई जिसमें कई अन्य मुद्दों के अलावा शहर का मास्टर प्लान भी एजेंडे में शामिल किया गया। बैठक की महत्वता को ध्यान में रखते हुए शहर की नई सांसद श्रीमती किरण खेर जोकि सलाहकार कमेटी की पदेन सदस्य भी ने प्रशासन को अपनी पहले से निश्चित अपनी व्यवस्तता के विषय में बता दिया था कि वह उक्त तिथि पर इस बैठक में उपस्थित नहीं हो पाएगी। परन्तु 29 जून 2014 के पश्चात आने वाले कई महीनों तक शहर में ही रहेंगी। वास्तव में शहर के लोगों की नजरअंदाजी का अंदाजा इसी बात से लग जाता है कि यह जो बैठक पिछली बार 30 नवम्बर 2012 को हुई थी को प्रशासन ने अपने कारणों से 19 जून 2014 को निश्चित कर लिया जोकि 29 जून के बाद किसी भी दिन हो सकती थी। स्पष्ट है कि जो बैठक पहले ही ढेड वर्ष से भी ज्यादा समय के पश्चात हो रही हो उसको 10 दिन ओर आगे करना कोई लम्बा समय नहीं था। इससे यह स्पष्ट है कि प्रशासन के मन में जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों के प्रति पूर्ण असम्मान है। यहां यह बताना जरूरी है कि लोकसभा सांसद का पदक्रम के मुताबिक प्रशासक से अगला स्थान है और सांसद को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है।

बैठक में संजय टंडन, पूर्व सांसद श्री सत्यपाल जैन, जिला परिषद के चेयरमैन श्री भजन सिंह माड़ू ने जब इस सारे विषय पर अपनी आपत्ति जताई तो उन्हें प्रशासक द्वारा जवाब दिया गया कि भूतकाल में केन्द्रीय मंत्री तक से बैठक की तिथि निश्चित करने के बारे में कभी बात नहीं की गई। यह तो केवल जनता की चुनी हुई प्रतिनिधि सांसद है। प्रशासक के द्वारा यह कहना कि बैठक निश्चित करना उनका विवेकाधिकार है और वह किसी से भी इस विषय में बाध्य नहीं हैं। और वह जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति में भी कार्य कर सकते हैं। उपरोक्त पूर्ण घटनाक्रम केवल प्रशासक का तानाशाही रवैया ही दर्शाता है।

यह विषय अतयन्त महत्वपूर्ण हैं क्योंकि शहर के लोग प्रशासक व प्रशासन के अफसरों के संबंधों के चुंगल से निकलना चाहते हैं और भाजपा प्रतिनिधि तथा ‘राजगÓ सरकार की ओर आशा भरी निगाहों से देखते हैं।

मैं आपसे निवेदन करता हूँ कि इस विषय में तुरन्त कार्यवाही की जाए ताकि लोगों की उम्मीदों से खिलवाड़ न हो और हम ओर असरदार ढंग से लोगों की सेवा कर सके।

मैं महसूस करता हूँ कि तुरन्त प्रभाव से वर्तमान सलाहकार परिषद भंग की जाए और जनता के सही मायनों में प्रतिनिधियों को लेकर इसका पूर्नगठन किया जाए।
इस पत्र के द्वारा मैं आपको सुझाव देना चाहता हूँ कि आप केन्द्रीय गृह सचिव को सरकारी तौर पर व्यक्तिगत रूप से चंडीगढ़ जाने का आदेश दें। जिससे वह यहां की परिस्थिति को स्वयं देख व महसूस कर सकें तथा नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व वाली राजग सरकार का ‘जनता के लिए सदा उपस्थितÓ का संदेश जनता में जा सके।

आदर सहित
संजय टंडन
प्रदेशाध्यक्ष, भाजपा चंडीगढ़